The Destroyed Village of Jonmani: Baghpat’s Untold Saga in the Revolution 1857
The Destroyed Village of Jonmani: Baghpat's Untold Saga in the Revolution 1857
विनाशित गांव जोनमानीः 1857 की क्रांति में बागपत की अनजानी गाथा
Mohit1, Dr Renu Jain2
1Research scholar History, 2Associate Professor History,
IIMT University, Meerut, U.P. IIMT University, Meerut, U.P.
drmohittyagig@gmail.com renu_soah@iimtindia.net
संक्षिप्त शोध सार-
जब सम्पूर्ण विश्व में हुई महानतम क्रांतियों की बात होती है तो उसमें भारत वर्ष में हुई 1857 की क्रांति का एक महत्वपूर्ण स्थान है। जिसे भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम भी कहा जाता है। जिसकी गूंज सारे संसार में सुनी गयी थी। जिसके माध्यम से भारत वर्ष ने पहली बार संगठित रूप से अंग्रेजो के विरूद्व विद्रोह का उदघोष किया था। इस संग्राम में भारत के आमजन, साधारण किसानो, मजदूरो, सेना के भारतीय जवानो ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। तीव्र गति से किये गये साधारण जनता के आघात से अंग्रेज त्राहीमाम-त्राहीमाम करने लगे थे। एक बार तो अंग्रेजो को भी लगने लगा था कि भारतवर्ष से उनका साम्राज्य समाप्त हो गया है। इस संग्राम में भारत वर्ष के सूरो ने बढ-चढ कर भाग लिया और पांच से आठ लाख लोगो ने अपना बलिदान दिया था। इस क्रांति की सबसे बडी विशेषता यह थी कि इसमें भारत के हर वर्ग, हर धर्म आम-ओ-खास, किसान-मजदूर, स्त्री-पुरूष, हिन्दू-मुस्लिम, बुढे और जवान सभी ने भाग लिया था। आज भी इनमें से अधिकांश बलिदानी अनजाने है। क्योकी इतिहासकारो ने भी कुछ खास लोगो के विषय में ही लिखा, बाकी साधारण जन के विषय में बहुत कम लिखा मिलता है। जबकी भारत वर्ष के कौने-कौने से वीरो ने इसमें भाग लिया और अपना सर्वोच बलिदान दिया था। अंग्रेजों द्वारा बहुत क्रुरता से इस क्रांति का दमन किया गया। बहुत से निर्दोष लोगो फांसी दी गयी, गांव के गांव जला दिये गये, लोगो को कोल्हू के नीचे जिन्दा कुचलवाया गया। अंग्रेजो द्वारा किये गये ऐसे अमानवीय कृत्य को झेलने वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत का एक गांव ’’जोनमानी” भी रहा है। जिसे अंग्रेजो द्वारा 1857 की क्रांति में हिस्सा लेने के कारण सम्पूर्ण रूप से जला दिया गया था। इस सम्पूर्ण गांव ने क्रांति की बलिवेदी पर स्वंय को बलिदान कर दिया था। जो बागपत वासियों व भारतीयों के लिए सदैव अनुकरणीय, आदरणीय व प्रेरणा का स्त्रोत रहेगा।
बीज शब्द- विनाश, गांव, उजड, विद्रोह